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बच्चों को मोबाइल से दूर कैसे रखें: व्यस्त मम्मी-पापा के लिए आसान, असली तरीके

"बस एक कौर और..." और फ़ोन पर कार्टून चल पड़ता है। फिर ऑटो में, फिर जब आप रसोई में हैं, फिर ऑफ़िस की कॉल के बीच, और आख़िर में सोते समय। कुछ ही महीनों में 2 साल का बच्चा सुबह उठते ही "मोबाइल!" माँगने लगता है। अगर आपके घर में भी ऐसा है, तो आप अकेले नहीं हैं, और इसमें शर्मिंदा होने की कोई बात नहीं।

यह लेख फ़ोन फेंक देने को नहीं कहता। यहाँ छोटे कदम हैं: सलाह क्या है, फ़ोन की जगह क्या दें, और बच्चा रोए तो क्या करें।

WHO और IAP असल में क्या कहते हैं

तीन जाने-माने स्रोत:

सीधी बात: 2 साल से छोटे बच्चे के लिए जितना हो सके उतना कम; 2–5 साल में थोड़ा, निगरानी में और साथ बैठकर।

कदम 1: देखिए, फ़ोन कब-कब हाथ में आता है

दो-तीन दिन बस ध्यान दीजिए कि बच्चे को फ़ोन कब मिलता है: खाना खिलाते समय, सफ़र में, जब आप काम में हों, या सोते समय। सब एक साथ नहीं, सबसे आसान पल से शुरुआत करें।

कदम 2: फ़ोन की जगह कुछ और दें

बिना कुछ दिए फ़ोन छीन लेने से बात शायद ही बनती है। छोटे बच्चे को हाथ में कुछ करने को चाहिए। एक छोटी "फ़ोन की जगह" वाली टोकरी पास रखें:

कदम 3: पहले खाना और सोना, बिना फ़ोन के

ये दो पल सबसे अहम हैं।

मोबाइल के बिना खाना कैसे खिलाएं: बच्चे को अपने साथ बैठाएँ, ताकि वह आपको खाते देखे। खाने के बारे में बात करें: "गरम-गरम रोटी! पीली दाल!" उसे छोटी चम्मच पकड़ने दें। शुरू में खाना गिरेगा और देर लगेगी। यह बिल्कुल सामान्य है।

सोते समय: वीडियो की जगह अपनी आवाज़। हर रात वही लोरी गाएँ, दिन भर की दो मिनट की कहानी सुनाएँ, या दादी-नानी की आवाज़ में लोरी सुनाएँ। परिवार की लोरियाँ और दादी की आवाज़ में लोरी वाले लेख में कुछ तरीके हैं। अगर फ़ोन से गाना चलाना ही हो, तो स्क्रीन बंद करके फ़ोन उल्टा रख दें।

कदम 4: साथ खेलिए, भले दस मिनट

छोटे बच्चे को फ़ोन से ज़्यादा आप चाहिए। अपना फ़ोन दूर रखकर दिए गए दस मिनट, आधे ध्यान वाले एक घंटे से अक्सर ज़्यादा काम करते हैं। ज़मीन पर बैठें, बच्चा जो खेले वही खेलें, उसकी आवाज़ों की नकल करें, चीज़ों के नाम बोलें।

कदम 5: पूरे घर के लिए "फ़ोन के नियम"

नियम तभी चलते हैं जब सब पर लागू हों, बड़ों पर भी:

बच्चे वही करते हैं जो देखते हैं। अगर खेलते समय हम ख़ुद स्क्रॉल करते रहें, तो बच्चा यही सीखता है कि कमरे में सबसे मज़ेदार चीज़ फ़ोन है।

मोबाइल न देने पर बच्चा रोए तो क्या करें

आँसू आएँगे, यह मानकर चलें। साल भर पुरानी आदत एक दिन में नहीं जाती।

जब नया रूटीन रोज़ एक जैसा चलने लगता है, तो आमतौर पर बात आसान हो जाती है। अगर बच्चे के बोलने, नींद, व्यवहार या विकास को लेकर चिंता हो, तो अपने बच्चों के डॉक्टर से बात करें।

अगर कभी स्क्रीन देनी ही पड़े

लंबा सफ़र, बीमारी या ऑफ़िस की अचानक कॉल; ऐसा होता है। तब:

छुन्नू जी कहाँ फ़िट होता है

छुन्नू जी स्क्रीन टाइम घटाने का तरीका नहीं है, और हम ऐसा दावा नहीं करते। पर अगर आप बच्चे के साथ करने के लिए छोटी, बताई हुई गतिविधियाँ ढूँढ रहे हैं, तो छुन्नू जी एक्टिविटी पैक में रंग, आकृतियाँ, लाइनें और रंग भरने जैसे छोटे खेल हैं, जो मम्मी-पापा के बच्चे के पास बैठकर करने के लिए बने हैं, और जिन्हें बाद में काग़ज़ पर भी आगे बढ़ाया जा सकता है।

हमारा Android ऐप भी Google Play पर Chunnu Ji नाम से है। इसमें कोई विज्ञापन नहीं, और इसके गाने और लोरियाँ स्क्रीन बंद करके सुनी जा सकती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2 साल के बच्चे का स्क्रीन टाइम कितना होना चाहिए?

WHO के मुताबिक़ 2 साल के बच्चे के लिए दिन में एक घंटे से ज़्यादा नहीं, और कम हो तो बेहतर। IAP 2 से 5 साल के बच्चों के लिए दिन में ज़्यादा से ज़्यादा एक घंटा, बड़ों की निगरानी में, कहता है।

क्या 2 साल से छोटे बच्चे को थोड़ा मोबाइल दिखा सकते हैं?

WHO एक साल के बच्चे के लिए बैठे-बैठे स्क्रीन देखना नहीं सुझाता, और IAP 2 साल से छोटे बच्चों के लिए कोई स्क्रीन नहीं कहता। AAP 18 महीने से छोटे बच्चों के लिए सिर्फ़ परिवार से वीडियो कॉल को छूट देता है।

बच्चों की मोबाइल की लत कैसे छुड़ाएं?

एक-एक पल से शुरू करें (पहले खाना या सोना), फ़ोन की जगह कोई असली गतिविधि दें, पूरे घर के लिए एक जैसे नियम रखें, और ख़ुद भी बच्चे के सामने फ़ोन कम चलाएँ। धैर्य रखें; डाँटने से ज़्यादा प्यार और नियमितता काम आती है।

मोबाइल के बिना बच्चे को खाना कैसे खिलाएं?

बच्चे को अपने साथ बैठाएँ, खाने के बारे में बात करें, उसे चम्मच पकड़ने दें और थोड़ा बिखराव मान लें। दिन में एक बार के खाने से शुरुआत करें।

फ़ोन की जगह बच्चे को क्या दें?

ट्रेसिंग और रंग भरने के पन्ने, घर के छोटे काम, ब्लॉक, गेंद, बाहर की सैर, और परिवार की आवाज़ में गाने-कहानियाँ। छुन्नू जी की मुफ़्त किताबें अच्छी शुरुआत हैं।